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लखनऊ। खाकी की आड़ में रक्षक ही जब भक्षक बन जाए, तो कानून और न्याय की चौखट पर उम्मीद लेकर पहुंची पीड़िता कहां जाए? राजधानी लखनऊ के आशियाना थाने से कानून-व्यवस्था और पुलिसिया कार्यप्रणाली को शर्मसार कर देने वाला एक खौफनाक और घिनौना मामला सामने आया है।

📍 उत्तर प्रदेश (लखनऊ) 📅 03 Aug 2026 ✍️ लखनऊ प्रशासनिक प्रधान कार्यालय से सुमन दुबे की रिपोर्ट
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लखनऊ। खाकी की आड़ में रक्षक ही जब भक्षक बन जाए, तो कानून और न्याय की चौखट पर उम्मीद लेकर पहुंची पीड़िता कहां जाए? राजधानी लखनऊ के आशियाना थाने से कानून-व्यवस्था और पुलिसिया कार्यप्रणाली को शर्मसार कर देने वाला एक खौफनाक और घिनौना मामला सामने आया है।

बेड की छात्रा से शादी का झांसा देकर और केस को मजबूत बनाने के नाम पर लगातार यौन शोषण करने वाले आरोपी वरिष्ठ उपनिरीक्षक (SSI) धर्मवीर शाही को महकमे ने निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है।

न्याय की गुहार और \'सौदा\'

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सूत्रों के मुताबिक, पीड़िता ने पूर्व में बस्ती निवासी अभिषेक सिंह नाम के युवक पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का संगीन आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। इस संवेदनशील मामले की विवेचना की जिम्मेदारी आशियाना थाने के दरोगा धर्मवीर शाही के कंधों पर थी।

न्याय की आस में थाने के चक्कर काट रही बेबस छात्रा को क्या पता था कि जिस खाकी पर वह भरोसा कर रही है, वही उसकी बेबसी का सौदा करने पर आमादा है। पीड़िता का आरोप है कि जांच अधिकारी दरोगा ने उसे थाने में अपने सरकारी कमरे में बुलाया और बेहद शर्मनाक शर्त रखते हुए कहा:

\"तुम्हारा रेप केस पुराना हो गया है। अगर एक बार मेरे साथ संबंध बना लोगी, तो मेडिकल रिपोर्ट तुम्हारे पक्ष में सही आ जाएगी और केस मजबूत हो जाएगा।\"

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वर्दी की आड़ में शोषण का खेल

आरोप है कि पीड़िता को केस की पैरवी, मेडिकल जांच सही कराने और बाद में शादी करने का सब्जबाग दिखाकर दरोगा लगातार उसका शारीरिक शोषण करता रहा। दोनों के एक साथ सार्वजनिक स्थानों पर घूमने और नजदीकियों की कई तस्वीरें भी सामने आई हैं, जो इस पूरे आपराधिक कृत्य और वर्दी के दुरुपयोग की दास्तान चीख-चीखकर बयां कर रही हैं।

सवालिया निशान और प्रशासनिक कार्रवाई

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मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आते ही महकमे में हड़कंप मच गया। प्राथमिक जांच में प्रथम दृष्टया आरोप और साक्ष्यों की गंभीरता को देखते हुए आरोपी SSI धर्मवीर शाही को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।

लेकिन यह घटना महकमे पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है—जब न्याय दिलाने वाले ही जांच की आड़ में पीड़िता का सौदा करने लगें, तो पीड़ित का व्यवस्था पर से विश्वास उठना स्वाभाविक है। वर्दी पर लगा यह दाग महज एक दरोगा का निलंबन नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की साख पर लगा एक गहरा आघात है।

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प्रतिक्रियाएं / कमेंट्स

👤 salauddin khan 03 Aug, 01:30 PM

ऐसे लोगों पर कार्रवाई होना चाहिए